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"मोती लाल" जिनके रोम रोम में अभिनय बसा था

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image Motilal as Chunnilal in Devdas

धूम ( Dhoom 1953), देवदास (Devdas 1955), जागते रहो (Jagte Raho 1956), अब दिल्ली दूर नहीं ( Ab Delhi Dur nahi 1957), पैगाम (Paigham 1959), अनाड़ी (Anari 1959), परख ( Parakh 1960), ये रास्ते हैं प्यार के (Yeh Raaste Hain Pyar Ke 1963), लीडर (Leader 1964), जी चाहता है (Ji Chahta Hai 1964), वक्त(Waqt 1965)। ये जिन्दगी कितनी हसीन है (Yeh Zindagi Kitni Haseen Hai 1966) में मोतीलाल (Motilal) की मृत्यु के बाद आयी।

"वे हर युग में हिन्दी सिनेमा के बेहतरीन अभिनेता हैं" जाने माने अभिनेता नसिरूद्दीन शाह के ये शब्द उस महान अभिनेता को श्रद्धांजली है जिसे हिन्दी सिनेमा में मोती लाल (Motilal) के नाम से जाना जाता है.

मोती लाल का पूरा नाम है मोती लाल राजवंश. मोती लाल राजवंश का जन्म 1910 में शिमला में हुआ था. मोती लाल (Motilal) 1934 से लेकर 1965 तक सिने जगत में सक्रिय रहे. मोती लाल शुरू में मुख्य अभिनेता हुआ करते थे लेकिन बाद में सहअभिनेता के तौर पर अभिनय करने लगे. सह अभिनेता के तौर पर इन्हें काफी सराहना और प्रशंसा भी मिली. इस दौर में चरित्र अभिनेता के तौर पर इन्होंने काफी ख्याति हासिल की. आज के चरित्र अभिनेता हों अथवा अभिनेता मोती लाल (Motilal) के अभिनय का लोहा मानते हैं.

मोती लाल ने जिन जिन फिल्मों में काम किया अपने अभिनय में पूरी ईमानदारी दिखाई. सर्वश्रेष्ठ अभिनय के तौर पर देवदास (Devdas 1955) में चुन्नी बाबु के किरदार के लिए इन्हें सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेता का फिल्म फेयर अवार्ड मिला था. इस फिल्म में इन्होंने दिलीप कुमार के साथ विमल राय के निर्देशन में काम किया था.

इनका नाम उस समय की चर्चित अभिनेत्री शोभना सामर्थ (Sobhana Samarth) के साथ काफी समय तक जुड़ा रहा. इस दौर में इन्होंने शोभना की पुत्री नूतन के लिए हमारी बेटी में काम किया. इसमें मोती लाल नूतन के पिता की भूमिका में रहे. इसी प्रकार अनाड़ी (Anari 1959) में भी इन्होंने नूतन के पिता का किरदार निभाया. फिल्म में इनकी भूमिका खलनायक की रही. शोभना के बाद नादिरा के साथ भी मोती लाल के बहुत ही करीबी संबंध रहे.

मोती लाल राजवंश (Motilal Rajvansh) को 1960 में परख (Parakh) फिल्म में देवदास के बाद दूसरी बार फिल्म फेयर अवार्ड से नवाज़ा गया था. इन्होंने अपने जीवन में एक फिल्म का निर्देशन भी किया जिसका नाम है छोटी छोटी बातें (Chhoti Chhoti Baatein 1965).

इस महान कलाकार का अंतिम समय तंगहाली में गुजरा और अंतत: जुए, शराब और रेस में अपनी पूंजी बर्बाद करने के बाद 1965 में दुनियां से विदा हो गये. और छोड़ गये अपनी यादगार फिल्में.

कुछ प्रमुख फिल्में :
वतन परस्त ( Vatan Parasta 1934), शहर का जादू (Shaher Ka Jadoo 1934), सिल्वर किंग (Silver King 1935), डा. मधुरिका (Dr. Madhurika 1935), दो घड़ी की मौज़ (Do Ghadi Ki Mauj 1935), लग्न बंधन (Lagna Bandhan 1936),दो दिवाने (Do Diwane 1936), दिलावर (Dilawar 1936), जागीरदार (Jagirdar 1937), तीन सौ दिन के बाद ( Teen Sau Din ke Baad 1938), हम तुम और वो (Hum Tum Aur Woh 1938), आप की मर्जी (Aap ki Marzi 1939), होली (Holi 1940) , अछूत (Achhut i/ii 1940), ससुराल(Sasural 1941), मुज़रिम (Mujrim 1944), दोस्त ( Dost 1944), हंसते आंसू (Hanste Ansoo 1950), धूम ( Dhoom 1953), देवदास (Devdas 1955), जागते रहो (Jagte Raho 1956), अब दिल्ली दूर नहीं ( Ab Delhi Dur nahi 1957), पैगाम (Paigham 1959), अनाड़ी (Anari 1959), परख ( Parakh 1960), ये रास्ते हैं प्यार के (Yeh Raaste Hain Pyar Ke 1963), लीडर (Leader 1964), जी चाहता है (Ji Chahta Hai 1964), वक्त(Waqt 1965)। ये जिन्दगी कितनी हसीन है (Yeh Zindagi Kitni Haseen Hai 1966) में मोतलाल (Motilal) की मृत्यु के बाद आयी।

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