यादें

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मादक आवाज़ की मलिका गीता दत्त

1951 तक गीता भजन और दर्द भरे नग्मों के लिए जानी जाती रहीं. सन् 1951 में आई फिल्म "बाजी" गुरूदत्त की इस फिल्म के संगीतकार एस डी वर्मन ने गीता से एक गाना गवाया
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बलराज साहनी रूपहले पर्दे के चमकते सितारे

1953 में दो बीघा जमीन (Do Bigha Zamin) ज़मीन पर्दे पर आई जिसका निर्देशन विमल रॉय (Vimal Roy) ने किया था.इस फिल्म में शम्भू रिक्शे वाले की भूमिका में जिस तरह बलराज ने वास्तविक जिन्दग़ी को पर्दे पर उतार दिया उसकी कल्पना स्वयं निर्देशक विमल रॉय को भी नहीं थी....
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"मोती लाल" जिनके रोम रोम में अभिनय बसा था

धूम ( Dhoom 1953), देवदास (Devdas 1955), जागते रहो (Jagte Raho 1956), अब दिल्ली दूर नहीं ( Ab Delhi Dur nahi 1957), पैगाम (Paigham 1959), अनाड़ी (Anari 1959), परख ( Parakh 1960), ये रास्ते हैं प्यार के (Yeh Raaste Hain Pyar Ke 1963), लीडर (Leader 1964), जी चाहता है (Ji Chahta Hai 1964), वक्त(Waqt 1965)। ये जिन्दगी कितनी हसीन है (Yeh Zindagi Kitni Haseen Hai 1966) में मोतीलाल (Motilal) की मृत्यु के बाद आयी। ...
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दास्ताने मीना कुमारी

मीना कुमारी (Meena Kumari) की यादगार फिल्म: परिणीता (Parineeta (1953), आजाद ( Azaad (1955), एक ही रास्ता (Ek hi Raasta (1956), नया अंदाज (Naya Andaaz (1956), मिस मैरी (Miss Mary (1957), यहूदी (Yahudi (1958), ...
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