मादक आवाज़ की मलिका गीता दत्त
1951 तक गीता भजन और दर्द भरे नग्मों के लिए जानी जाती रहीं. सन् 1951 में आई फिल्म "बाजी" गुरूदत्त की इस फिल्म के संगीतकार एस डी वर्मन ने गीता से एक गाना गवाया
(तदबीर से बिगड़ी हुई तकदीर बनाले अपने पे भरोसा है तो इक दांव लगा ले.और गीता दत्त अपनी मादकआवाज के साथ छा गईं.
सन् 1930 में पूर्वी बंगल के फरीदपुर जिले में गीता का जन्म हुआ था जो बाद में गीता दत्त (Geeta Dutt) के नाम से मशहूर हुई. गीता के पिता परिवार समेत 1942 में मुम्बई आ गये, इस समय गीता सिर्फ 12 वर्ष की थी. संगीत निर्देशक हनुमान प्रसाद ने एक बार गीता को उनके घर पर गाते सुना इससे प्रभावित होकर उन्होंने 1946 में अपनी फिल्म भक्त प्रह्लाद के लिए गीता को गाने का मौका दिया. इस गीत से गीता ने गायिका के रूप में अपना करियर शुरू किया. गीता दत्त (Geeta Dutt) को पहचान मिली 1947 में आई फिल्म "दो भाई" से एस डी वर्मन के संगीत निर्देशन में इस फिल्म का एक गीत "मेरा सुन्दर सपना बीत गया" इस कदर लोकप्रिय हुआ कि गीता रातों रात सुपहस्टार बन गयीं. इस फिल्म से चली आंधी 1949 तक कायम रही.
1449 में तीन फिल्में पर्दे पर आई इन फिल्मों को अपार सफलता मिली और इस फिल्म से एक नया नाम उभर कर आया लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar). लता इन दिनों सभी संगीत निर्देशकों की चहेती बन गयी और गीता को इस दौर में अपनी स्थिति को बनाये रखने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा.
1951 तक गीता भजन और दर्द भरे नग्मों के लिए जानी जाती रहीं. सन् 1951 में आई फिल्म "बाजी" गुरूदत्त की इस फिल्म के संगीतकार एस डी वर्मन ने गीता से एक गाना गवाया (तदबीर से बिगड़ी हुई तकदीर बनाले अपने पे भरोसा है तो इक दांव लगा ले. इस गीत ने गीता की आवाज़ को एक नई पहचान दिलाई वो उन दिनो की रांक स्टार बन गयी. उन दिनों के लगभग सभी आईटम सांग को गीता दत्त (Geeta Dutt) की आवाज़ में रिकार्ड किया गया. गीत की आवज़ में खनक और सेक्स अपील की बात संगीत निर्देशक स्वीकार करने लगे.
26 मई 1953 को गीता रांय ने गुरूदत्त से विवाह कर लिया और तभी से गीता राय (गीता दत्त (Geeta Dutta)) बन गयीं. इन दोनों की तीन संतान हुई, जिनमें दो बेटे तरूण, अरूण और एक बेटी नीना. 1957 में गुरूदत्त का झुकाव वहीदा रहमान की ओर होने लगा जिससे गीता के वैवाहिक जीवन में दरारें आ गई. इस समय से गीता टूटती चली गई और खुद को शराब में डूबोने दिया. 1964 में गुरूदत्त की मृत्यु के पश्चात गीता की मानसिक रूप से परेशान रहने लगीं. जब मानसिक परेशानी के दौर से बाहर आयीं तो आर्थिक समस्याओं ने आकर घेर लिया. इस दौर में गीता दत्त (Geeta Dutt) ने कुछ स्टेज शो भी किये. अंतत: 20 जुलाई 1972 को गीता दत्त (Geeta Dutt) हम संगीत प्रमियों को अलविदा कह गयीं.
अपने दौर में गीता दत्त (Geeta Dutt) ने हर संगीत निर्देशक के साथ काम किया. गीता दत्त (Geeta Dutt) एस डी वर्मन और ओ पी नैयर की पसंदीदा गायिका थी. गीता दत्त (Geeta Dutt) ने हिन्दी के अलावा बंगाली और गुजराती में भी गीत गाये हैं. गीत दत्त के कुछ यादगार गीतों में:
मेरा सुंदर सपना टूट गया (Do Bhai (1947 ), आजा बेदर्दी बलम (Saheed 1948), घुंघट के पट खोल(Jogan 1950), तदबीर से बिगड़ी (Baazi 1951), ऐ जाने वफा (Anarkali (1953), ऐ दिले दीवाना (Baaz (1953), ये लो मैं हारी पिया (Aar Paar (1954), न ये चांद होगा (Shart 1954), ठंढी हवा काली घटा (Mr. and Mrs.55 1955), ऐ दिल मुझे बता दे(Bhai Bhai 1956), जाता कहां है (C.I.D 1956), आज सजन मोहे अंग लगाले (Pyaasa 1957), कैसा जादू बालम तूने (12 o' Clock -1958), हवा धीरे आना (Sujata 1959), वक्त ने किया(Shaib Bibi aur Ghulam 1962), पिया ऐसो जिया में (Shaib Bibi aur Ghulam 1962), मेरी जान मुझे (Anubhav 1971) ये गीत तो सिर्फ गीता दत्त (Geeta Dutt) का एक परिचय मात्र है, वास्तव में गीता के गीतों की फेहरिस्त काफी लम्बी है.




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